Palitana 5 Chaityavandan In Hindi _verified_ Full -
1. जय तलेटी (Jay Taleti) - पहली चैत्यवंदन
यात्रा के बारे में भी जानना चाहेंगे?
चूँकि पालिताना में एक ही दिन में 5 या उससे अधिक मंदिर देखे जाते हैं, इसलिए इस विधि का पालन करें:
यह पहला चैत्यवंदन है, जो शत्रुंजय पर्वत पर चढ़ाई शुरू करने से पहले तळेटी (पहाड़ी का आधार) पर किया जाता है। यह यात्रा के शुभारंभ का प्रतीक है। प्रार्थना (गुजराती में): "श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव भरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे। अनंत सिद्धनो एह ठाम, सकळ तीर्थनो राय; पूर्व नवाणुं ऋषभदेव, ज्यां ठविया प्रभु पाय।"। इस प्रार्थना के माध्यम से यात्रा में सफलता और मोक्ष की कामना की जाती है। palitana 5 chaityavandan in hindi full
आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं।
पुंडरीक स्वामी ने इसी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था। विधि:
णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्व साहूणं एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं। छे पगला मनोहार
मैं अरिहंत (तीर्थंकर) को नमस्कार करता हूँ, मैं सिद्ध (मुक्त आत्माओं) को नमस्कार करता हूँ, मैं आचार्य को नमस्कार करता हूँ, मैं उपाध्याय को नमस्कार करता हूँ, मैं संसार के समस्त साधुओं को नमस्कार करता हूँ।
एह गिरी ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो;रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो।एह गिरिनी महिमा अनंत, कुण करे वखाण;चैत्री पूनमने दिने, तेह अधिको जाण।एह तीर्थ सेवो सदा, आणी भक्तिधार;श्री शत्रुंजय सुखदायको, दानी विजय जयकार।
"जय तलेटी शत्रुंजय सार..." या तलेटी के विशिष्ट स्तवन बोले जाते हैं। भाव सहित भक्ति करे
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: रायण पेड़ (रायण पगला)
तीसरा चैत्यवंदन 'रायण पगलिये' नामक स्थान पर किया जाता है। प्रार्थना: "आदि जिनेश्वर रायना, छे पगला मनोहार, भाव सहित भक्ति करे, पहोंचाडे भवपार... रायण रुख तळे बिराजी, दीओ जगने संदेश, भवियण भावे..."। मान्यता है कि स्वयं भगवान ऋषभदेव ने इसी स्थान पर पहले पगलियां (पगलियाँ – पैरों के निशान) छोड़े थे। इसलिए यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां का चैत्यवंदन मोक्ष के निकट पहुंचने का प्रतीक है।
